
बस्ती। जनपद में संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटरों और स्वास्थ्य विभाग की पीसीपीएनडीटी शाखा की कार्यप्रणाली को लेकर राष्ट्रीय पत्रकार एकता संघ के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल सिंह ने उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर पुनः शिकायत सौंपी। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। शिकायत में पूर्व में 18 अगस्त 2026 को जिलाधिकारी बस्ती को दी गई शिकायत पर अब तक हुई कार्रवाई की भी शासन स्तर से समीक्षा कराने का अनुरोध किया गया है।राहुल सिंह की ओर से स्वास्थ्य मंत्री को दी गई शिकायत में कहा गया है कि 18 अगस्त को जिलाधिकारी के समक्ष विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की गई थी, जिसे मुख्य विकास अधिकारी बस्ती को कार्रवाई के लिए भेजा गया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि पर्याप्त समय बीत जाने के बाद भी शिकायत के सभी बिंदुओं पर प्रभावी जांच होने तथा जांच की स्थिति, रिपोर्ट और कार्रवाई के संबंध में उसे लिखित जानकारी नहीं दी गई। इसी को लेकर अब स्वास्थ्य मंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।शिकायत में 1 जनवरी 2024 से 5 मार्च 2026 तक की अवधि के अभिलेखीय एवं स्थलीय जांच की मांग की गई है। इसमें जनपद में पंजीकृत सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों का ब्लॉकवार विवरण प्राप्त करने, प्रत्येक सेंटर पर कार्यरत चिकित्सक का नाम, शैक्षणिक योग्यता, डिग्री एवं मेडिकल रजिस्ट्रेशन का सत्यापन कराने की मांग की गई है। साथ ही सेंटरों के वास्तविक संचालक का नाम, पता एवं उपलब्ध संपर्क विवरण, पंजीकरण आवेदन, निरीक्षण रिपोर्ट, सत्यापन रिपोर्ट, निरीक्षण के दौरान लिए गए फोटो तथा निरीक्षण करने वाले अधिकारी-कर्मचारी के नाम व पद से संबंधित अभिलेखों की जांच कराने को कहा गया है।शिकायत में सेंटरों के पंजीकरण के समय प्रस्तुत नक्शे और लेआउट प्लान, किरायानामा अथवा स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन कराने की मांग की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सेंटर उसी स्वीकृत स्थान पर संचालित हो रहे हैं या नहीं। सभी सेंटरों में PCPNDT Act एवं संबंधित नियमों के अनुपालन की भी जांच कराने का अनुरोध किया गया है। नियमित निरीक्षण के दौरान योग्य चिकित्सक की वास्तविक मौजूदगी, निरीक्षण के समय लिए गए फोटो, निरीक्षण रिपोर्ट और रजिस्टर की जांच के साथ सभी सेंटरों द्वारा प्रस्तुत Form-F, उनकी जमा तिथि तथा संबंधित डॉक्टरों के हस्ताक्षरयुक्त अभिलेखों का सत्यापन कराने की मांग की गई है।राहुल सिंह ने जनपद में अब तक सीज किए गए सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों का विवरण, सीज करने का कारण तथा उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई की भी समीक्षा कराने को कहा है। जिन सेंटरों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनके नोटिस, जवाब और अनुपालन की स्थिति की जांच तथा सीज किए गए सेंटरों के विरुद्ध PCPNDT Act अथवा अन्य लागू कानूनों के तहत मुकदमा दर्ज हुआ या नहीं, इसकी भी जांच कराने की मांग की गई है।शिकायत में डॉ. अशोक चौधरी की भूमिका की विशेष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने का अनुरोध किया गया है। शिकायत के अनुसार डॉ. अशोक चौधरी करीब 20 वर्षों से जनपद बस्ती में विभिन्न पदों पर तैनात रहे और स्वास्थ्य विभाग एवं PCPNDT से संबंधित जिम्मेदारियों से जुड़े रहे हैं। उनकी तैनाती, पदस्थापन, स्थानांतरण और उनके द्वारा संभाले गए पदों का पूरा अभिलेखीय विवरण प्राप्त करने तथा उनके कार्यकाल में अल्ट्रासाउंड सेंटरों के पंजीकरण, नवीनीकरण, निरीक्षण और नोटिस आदि की प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग की गई है।शिकायत में रुधौली क्षेत्र में किसी निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर अथवा अन्य चिकित्सा प्रतिष्ठान के संचालन, स्वामित्व, प्रबंधन या प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष संबंध की भी जांच कराने की मांग की गई है। यदि जांच में किसी निजी चिकित्सा प्रतिष्ठान से संबंध पाया जाता है तो उसके पंजीकरण, लाइसेंस, चिकित्सकीय स्टाफ, संचालन एवं विभागीय निरीक्षणों की भी जांच कराने का अनुरोध किया गया है। शिकायत में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।राहुल सिंह ने डॉ. अशोक चौधरी की चल-अचल संपत्तियों और आय के स्रोतों की नियमानुसार सक्षम प्राधिकारी से जांच कराने तथा आवश्यकता पाए जाने पर संबंधित अभिलेखों के आधार पर संपत्तियों के स्रोत का सत्यापन कराने की भी मांग की है। यदि जांच में पद के दुरुपयोग, हितों के टकराव, आय-संपत्ति में प्रथम दृष्टया असंगति अथवा किसी नियम-कानून के उल्लंघन के तथ्य सामने आते हैं तो नियमानुसार विभागीय एवं विधिक कार्रवाई की मांग की गई है।शिकायत में कुछ अल्ट्रासाउंड सेंटरों से Form-F संबंधी कार्यों के नाम पर कथित रूप से पांच हजार रुपये की मांग या वसूली किए जाने की शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें सीएमओ कार्यालय की PCPNDT शाखा में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी गरिमा चौधरी तथा नोडल अधिकारी डॉ. अशोक चौधरी की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की गई है। राहुल सिंह ने कहा है कि इस मामले की जांच ऐसे अधिकारी अथवा समिति से कराई जाए, जो संबंधित शाखा से प्रत्यक्ष रूप से संबद्ध न हो।शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि सक्षम जांच अधिकारी आवश्यक और विधिसम्मत समझे तो संबंधित व्यक्तियों के CDR, उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और वित्तीय लेन-देन की जांच कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत कराई जाए। पूर्व में उपलब्ध कराए गए मोबाइल नंबरों एवं अन्य साक्ष्यों की भी आवश्यकता के अनुसार विधिसम्मत तरीके से जांच कराने का अनुरोध किया गया है।राहुल सिंह ने 18 अगस्त 2026 की पूर्व शिकायत पर हुई कार्रवाई की शासन स्तर से समीक्षा कराने की मांग करते हुए यह भी पूछा है कि शिकायत किस अधिकारी को भेजी गई, जांच अधिकारी किसे नियुक्त किया गया, अब तक क्या कार्रवाई हुई, किन अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान लिए गए, किन अभिलेखों की जांच की गई, स्थलीय निरीक्षण कराया गया या नहीं और जांच रिपोर्ट तैयार हुई अथवा नहीं। यदि जांच लंबित है तो उसके कारण की भी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।शिकायतकर्ता ने कहा है कि चूंकि मामले में स्वास्थ्य विभाग एवं PCPNDT शाखा से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच का विषय है, इसलिए मामले की जांच जनपद स्तर के संबंधित अधिकारियों के बजाय मंडलीय अथवा शासन स्तर के स्वतंत्र अधिकारी या समिति से समयबद्ध तरीके से कराई जाए। उन्होंने कहा कि अल्ट्रासाउंड सेंटरों का पंजीकरण, योग्य चिकित्सकों की उपलब्धता, PCPNDT Act का अनुपालन, Form-F के अभिलेख और नियमित निरीक्षण व्यवस्था सीधे आमजन के स्वास्थ्य हित से जुड़े विषय हैं। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच व्यापक जनहित में आवश्यक है।राष्ट्रीय पत्रकार एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री से सभी बिंदुओं पर स्वतंत्र जांच कराने, किसी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति अथवा संस्था के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय एवं विधिक कार्रवाई करने तथा जांच पूरी होने के बाद जांच रिपोर्ट और की गई कार्रवाई से शिकायतकर्ता को लिखित रूप से अवगत कराने की मांग की है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि निर्धारित अवधि में निष्पक्ष जांच और प्रभावी कार्रवाई नहीं होती है तथा शिकायतकर्ता को जांच एवं कार्रवाई से अवगत नहीं कराया जाता है तो वह अपने विधिक अधिकारों के तहत न्यायालय की शरण लेने के लिए बाध्य होगा।






