उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों के प्रति शासन-प्रशासन की संवेदनशीलता पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। रामपुर तिराहा गोलीकांड के शहीदों की मूर्तियों की स्थापना की दो साल पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की थी, इसके बाद भी मूर्तियां नहीं लगीं।
हालांकि शासन की ओर से इसका आदेश जारी किया गया, इसमें सभी शहीदों की मूर्तियां लगाने के बजाय केवल चार की मूर्तियों को ही स्थापित किए जाने की बात कही गई है। इस आदेश के सामने आने के बाद राज्य आंदोलनकारियों और शहीदों के परिवारों में गहरी नाराजगी है।
राज्य आंदोलन के दौरान दो अक्तूबर 1994 को उत्तराखंड अलग राज्य की मांग को लेकर दिल्ली जा रहे आंदोलनकारियों पर पुलिस ने मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर गोलीबारी की थी। पुलिस की इस गोलीबारी में सात आंदोलनकारी रविंद्र सिंह रावत, सत्येंद्र चौहान, गिरीश भद्री (भंडारी), राजेश लखेड़ा, सूर्य प्रकाश थपलियाल (सूर्य कुमार शर्मा), राजेश नेगी और अशोक कुमार शहीद हो गए थे।






