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इटवा के लक्ष्मी अल्ट्रासाउंड सेंटर और जनता सेवा हॉस्पिटल से जुड़े अभिलेखों का मामला गरमाया, आरटीआई कार्यकर्ता ने उठाए विभागीय पारदर्शिता पर सवाल; सूचना नहीं मिली तो न्यायालय में याचिका के साथ आरटीआई प्रकरण भी जोड़ने की चेतावनी Oplus_131072 सिद्धार्थनगर।...

इटवा के लक्ष्मी अल्ट्रासाउंड सेंटर और जनता सेवा हॉस्पिटल से जुड़े अभिलेखों का मामला गरमाया, आरटीआई कार्यकर्ता ने उठाए विभागीय पारदर्शिता पर सवाल; सूचना नहीं मिली तो न्यायालय में याचिका के साथ आरटीआई प्रकरण भी जोड़ने की चेतावनी

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सिद्धार्थनगर। स्वास्थ्य विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सिद्धार्थनगर जनपद के इटवा क्षेत्र में संचालित स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों से संबंधित अभिलेखीय सूचनाएं निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाते हुए आरटीआई कार्यकर्ता एवं पत्रकार राहुल सिंह ने प्रथम अपील की प्रक्रिया अपनाई है। मामला इटवा-डुमरियागंज मार्ग स्थित लक्ष्मी अल्ट्रासाउंड सेंटर, पैथोलॉजी एवं सीटी स्कैन सेंटर तथा पूर्व में सेवा अस्पताल के नाम से पंजीकृत और वर्तमान में जनता सेवा हॉस्पिटल के नाम से संचालित बताए जा रहे अस्पताल से संबंधित है।राहुल सिंह का कहना है कि उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों से महत्वपूर्ण अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं, लेकिन निर्धारित वैधानिक अवधि में सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद उन्होंने प्रथम अपील प्रस्तुत कर मामले में हस्तक्षेप और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। अब इस प्रकरण को अपर स्वास्थ्य निदेशक, बस्ती मंडल, बस्ती के समक्ष उठाने की बात कही गई है13 अगस्त को हुई जांच के अभिलेखों पर मांगा जवाबराहुल सिंह के अनुसार, 19 अगस्त 2026 को जनसूचना अधिकारी एवं पीसीपीएनडीटी प्रकोष्ठ, सिद्धार्थनगर के समक्ष आवेदन देकर इटवा स्थित लक्ष्मी अल्ट्रासाउंड सेंटर, पैथोलॉजी एवं सीटी स्कैन सेंटर की 13 अगस्त 2026 को नोडल अधिकारी डॉ. मानवेन्द्र पाल द्वारा की गई जांच से संबंधित अभिलेख मांगे गए थेइसमें जांच रिपोर्ट, निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों और अनियमितताओं का विवरण, संस्थान के पंजीकरण एवं नवीनीकरण संबंधी दस्तावेज, अल्ट्रासाउंड संचालित करने वाले डॉक्टर की शैक्षिक योग्यता तथा मेडिकल काउंसिल पंजीकरण की जानकारी शामिल हैइसके अतिरिक्त पैथोलॉजी और सीटी स्कैन संचालन की अनुमति, संबंधित चिकित्सकों एवं तकनीकी कर्मचारियों की योग्यता, अग्निशमन विभाग की एनओसी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति और बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण से जुड़े अभिलेख भी मांगे गए हैंअपील में जांच के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन, चिकित्सकों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति, जारी नोटिस, विभागीय कार्रवाई और उच्चाधिकारियों के साथ हुए पत्राचार की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की गई हैसेवा अस्पताल से जनता सेवा हॉस्पिटल तक की पत्रावली पर सवालदूसरा मामला इटवा चौराहा-डुमरियागंज-बढ़नी मार्ग स्थित पूर्व पंजीकृत सेवा अस्पताल एवं वर्तमान जनता सेवा हॉस्पिटल से संबंधित है। राहुल सिंह के अनुसार, उन्होंने 29 जुलाई 2026 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, सिद्धार्थनगर में जनसूचना आवेदन प्रस्तुत कर अस्पताल के पंजीकरण, स्वामित्व, संचालन और विभागीय कार्रवाई से जुड़े अभिलेख मांगे थेइसमें पुराने अस्पताल का पंजीकरण समाप्त करने, नए नाम से पंजीकरण की अनुमति, भवन सील किए जाने के आदेश, सील खोलने की अनुमति, निरीक्षण रिपोर्ट, पंचनामा और संबंधित अधिकारियों की भूमिका से जुड़े दस्तावेज शामिल हैंआवेदन में अस्पताल परिसर से कथित तौर पर बरामद लगभग 50 पैरामेडिकल डिग्रियों एवं मुहरों से संबंधित बरामदगी सूची, सत्यापन रिपोर्ट, पुलिस शिकायत और कानूनी कार्रवाई के अभिलेख भी मांगे गए थे। इसके अलावा एमए फार्मा एवं मेडिकल एजेंसी के लाइसेंस, पंजीकरण और संबंधित परिसर में संचालन की अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की मांग की गई हैइन बिंदुओं पर किसी भी प्रकार की अनियमितता का अंतिम निष्कर्ष संबंधित अभिलेखों और सक्षम प्राधिकारी की जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता हैआखिर सूचना देने में देरी क्यों?आरटीआई कार्यकर्ता राहुल सिंह ने सवाल उठाया है कि जब आवेदन में विभागीय अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई हैं, तो निर्धारित समय में सूचना उपलब्ध कराने में देरी क्यों हो रही है? उनका कहना है कि स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों के पंजीकरण, जांच और सीलिंग जैसी कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण हैंहालांकि, सूचना उपलब्ध नहीं होने मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कोई अधिकारी किसी संस्थान को बचाने का प्रयास कर रहा है संबंधित अधिकारियों का पक्ष और विलंब के वास्तविक कारण सामने आना भी जरूरी हैसूचना नहीं मिली तो न्यायालय का रुख करेंगे राहुल सिंहराहुल सिंह ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रथम अपील के बाद भी नियमानुसार सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो वह मामले को सक्षम उच्चाधिकारी के समक्ष उठाने के साथ-साथ उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर संबंधित आरटीआई आवेदन, प्रथम अपील और सूचना न मिलने से जुड़े दस्तावेजों को न्यायालय में दायर की जाने वाली याचिका के साथ संलग्न किया जाएगा, ताकि पूरे मामले की जांच और विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की जा सकेउन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों के पंजीकरण, जांच और विभागीय कार्रवाई से जुड़े तथ्यों को अभिलेखों के माध्यम से सामने लाना है। यदि सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार हुई हैं, तो संबंधित दस्तावेज उपलब्ध होने से स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, यदि किसी स्तर पर नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो सक्षम अधिकारी नियमानुसार कार्रवाई कर सकेंगेस्वास्थ्य विभाग की पारदर्शिता की होगी परीक्षाअब निगाहें स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारियों पर हैं कि वे प्रथम अपील पर क्या निर्णय लेते हैं और मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने के संबंध में क्या कदम उठाते हैं। इस मामले में विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर और स्पष्ट होगीफिलहाल, दो स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों से संबंधित अभिलेखों की मांग और निर्धारित समय में सूचना नहीं मिलने की शिकायत ने विभागीय पारदर्शिता को लेकर बहस तेज कर दी है। यदि अपील के बाद भी सूचना नहीं मिलती है, तो मामला सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आगे की अपीलीय प्रक्रिया और संभावित न्यायिक कार्यवाही तक पहुंच सकता हैशीर्षक को संतुलित और तथ्यपरक बनाइएआरोप और प्रमाणित तथ्यों को अलग कीजिएदोनों आरटीआई मामलों की तारीखें स्पष्ट कीजिए

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Rahul Singh

Author at दूरदर्पण न्यूज़

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