देहरादून । देहरादून पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए राजपुर थाना क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित हो रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके से मुख्य सरगना समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह विदेशी नागरिकों को एंटीवायरस ऐप बेचने का झांसा देकर भारी मात्रा में ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा था।
एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल को राजपुर क्षेत्र में अवैध कॉल सेंटर के माध्यम से विदेशी नागरिकों से धोखाधड़ी किए जाने की गोपनीय सूचना प्राप्त हुई थी। इस पर संज्ञान लेते हुए उन्होंने राजपुर थानाध्यक्ष पीडी भट्ट को गहनता से जांच कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। प्राप्त निर्देशों के अनुपालन में सोमवार देर रात पुलिस की तीन अलग-अलग टीमों ने आर्चिड पार्क, तरला नागल रोड स्थित एक मकान में दबिश दी। पुलिस टीम को देखकर कुछ युवक मौके से फरार होने में सफल रहे, हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके से पांच आरोपियों को दबोच लिया।
पुलिस ने मौके से मुख्य सरगना आशीष नागर निवासी मोरिवाड़ा सिटी मेरठ उत्तर प्रदेश, अक्षत शर्मा निवासी शाहखाकी चौक सिटी मेरठ उत्तर प्रदेश, अंशू मुद्गल निवासी अनूपनगर फाजलपुर मेरठ उत्तर प्रदेश, राज सिंह निवासी सिलवारा रोड सिविल लाइन जिला सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश और अभिनव सिंह निवासी शास्त्री नगर जिला सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश को गिरफ्तार किया है। तलाशी के दौरान पुलिस ने उनके पास से 14 मोबाइल फोन, चार लैपटॉप, एक आईपैड व ठगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे अन्य उपकरण बरामद किए हैं।
पूछताछ के दौरान मुख्य सरगना आशीष नागर ने खुलासा किया कि वह पहले नोएडा के एक कॉल सेंटर में काम कर चुका है, जहां वह इसी प्रकार विदेशी नागरिकों से धोखाधड़ी करता था। करीब तीन महीने पहले वह नौकरी छोड़कर देहरादून आ गया था। उसने ट्रू कॉलर पर अपना नंबर ‘बॉस’ नाम से सेव किया हुआ था। आरोपियों ने विदेशी नागरिकों के लगभग 5,000 मोबाइल नंबर खरीद रखे थे, जिन्हें वे गूगल वॉयस ऐप के जरिए अमेरिका और कनाडा के नागरिकों को कॉल करते थे।
गिरोह के सदस्य विदेशी नागरिकों को उनके फोन में तकनीकी खराबी होने का झांसा देते थे और उसे ठीक करने के नाम पर ‘अवास्ट एंटीवायरस ऐप’ डाउनलोड करने की जानकारी देते थे। ऐप उपलब्ध कराने के एवज में वे ग्राहकों से 100 डॉलर कीमत के गिफ्ट कार्ड खरीदवाते थे। हैरानी की बात यह है कि पेमेंट मिलने के बाद भी वे महज 10 प्रतिशत ग्राहकों को ही एंटीवायरस ऐप उपलब्ध कराते थे और बाकी के साथ पूरी धोखाधड़ी करते थे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि विदेशी नागरिकों से मिलने वाले इन गिफ्ट कार्ड्स को वे चीनी नागरिकों को बेच देते थे, जिसके बदले चीनी नागरिक उनके खातों में पैसे डालते थे। पुलिस से बचने के लिए यह गिरोह कुछ दिन कॉल सेंटर चलाने के बाद अपनी जगह बदल देता था।
फरार अन्य आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं। देहरादून पुलिस की इस सराहनीय कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठगी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।







