हरिद्वार। करवाचौथ के पावन पर्व पर हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में मौसम खराब होने के बावजूद सुहागिन महिलाओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी देखने को नहीं मिली। गुरुवार को सुबह से हो रही लगातार बारिश और रातभर आसमान में छाए बादलों के कारण महिलाओं को चांद के दीदार नहीं हो पाए, लेकिन इसके बावजूद महिलाओं ने अपनी अटूट श्रद्धा के साथ विभिन्न वैकल्पिक तरीकों से अपना निर्जला व्रत संपन्न किया।
करवाचौथ को लेकर सुबह से ही महिलाओं में भारी उत्साह था। सुहागिनों ने अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ कठिन निर्जला व्रत रखा। शाम ढलते ही महिलाओं को बेसब्री से चंद्रोदय का इंतजार था, लेकिन लगातार बारिश और घने बादलों के कारण चंद्रमा बादलों की ओट में ही छिपा रहा।
तकनीक और परंपरा का अनूठा संगम, वीडियो कॉल से किए चांद के दर्शन
मौसम की इस बाधा को महिलाओं ने अपनी सूझबूझ और आधुनिक तकनीक के सहारे पार किया। जिन क्षेत्रों में चांद नजर नहीं आया, वहां की महिलाओं ने देश के अन्य हिस्सों में रहने वाले अपने रिश्तेदारों और परिचितों को वीडियो कॉल किया, जहां मौसम साफ था और चांद दिखाई दे रहा था। वीडियो कॉल के जरिए चांद के दर्शन कर महिलाओं ने अपना व्रत खोला और परंपरा का निर्वहन किया।
मंदिरों में उमड़ी भीड़, भगवान शिव के मस्तक पर सजे चंद्रदेव को अर्पित किया अर्घ्य
चांद न दिखने के कारण शाम होते ही कुछ जगहों पर स्थानीय मंदिरों में महिलाओं की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई। महिलाओं ने मंदिरों में जाकर भगवान शिव की मूर्ति और तस्वीर के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने शिवजी के मस्तक पर सुशोभित चंद्रदेव का पूजन किया और उन्हें अर्घ्य देकर अपना व्रत खोला।
चावल से आकृति बनाकर और मानसिक ध्यान से खोला व्रत
खराब मौसम के बीच सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक और रचनात्मक उपाय भी अपनाए, कई महिलाओं ने थाली में लाल कपड़ा बिछाकर चावल से चंद्रमा की आकृति बनाई और उसे अर्घ्य देकर व्रत खोला। वहीं कुछ स्थानों पर महिलाओं ने पंचांग के अनुसार चंद्रोदय के सही समय पर चंद्रमा की दिशा की ओर मुख करके मानसिक रूप से चंद्रदेव का ध्यान करते हुए अर्घ्य दिया और व्रत पूरा किया।
प्रतिकूल मौसम भी सुहागिनों के अटूट प्रेम, समर्पण और करवाचौथ के प्रति उनकी गहरी आस्था को डिगा नहीं सका। महिलाओं ने तमाम बाधाओं के बावजूद पूरी श्रद्धा के साथ पर्व मनाते हुए अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।



