
सिद्धार्थनगर। इटवा स्थित जनता सेवा हॉस्पिटल की सील खोले जाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है नवजात शिशु की मौत के मामले से चर्चा में आए इस अस्पताल को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर शिकायतकर्ता ने गंभीर सवाल उठाए हैं
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय दोहरे के कथित बयान, “आवेदन आया था तो खोल दिया”, के बाद अब सील खोलने की प्रक्रिया और उसके आधार को लेकर जवाबदेही की मांग की जा रही है
मकान मालिक के आवेदन पर खुली सील, पंजीकृत संचालक की अनुपस्थिति पर सवाल
शिकायतकर्ता के अनुसार, मकान मालिक पुजारी यादव ने स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में आवेदन देकर कहा था कि अस्पताल के पंजीकृत संचालक प्रमोद कुमार किराया नहीं दे रहे हैं और मकान खाली कराना है। इसी के आधार पर अस्पताल की सील खोलने की कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है
सबसे बड़ा सवाल यह है कि मकान खाली कराने संबंधी आवेदन के आधार पर अस्पताल की सील खोलने से पहले विभाग ने पंजीकरण, पूर्व जांच आख्या और सीलिंग आदेश की शर्तों का परीक्षण किया था या नहीं?
शिकायतकर्ता का दावा है कि सील खोलते समय पंजीकृत संचालक प्रमोद कुमार मौजूद नहीं थे
राकेश यादव को चाबी सौंपने के आरोप से बढ़ा विवाद
शिकायतकर्ता के मुताबिक, नोडल अधिकारी ने बताया था कि फोन पर बातचीत के बाद चाबी राकेश यादव को देने की बात कही गई
इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या चाबी सौंपने का लिखित आदेश जारी हुआ था?
किस अधिकारी ने इसकी अनुमति दी?
और क्या संबंधित व्यक्ति को अस्पताल संचालित करने की वैधानिक अनुमति भी दी गई थी?
शिकायतकर्ता का कहना है कि सील खोलने और अस्पताल संचालन की अनुमति दो अलग-अलग विषय हैं। केवल सील खोल दिए जाने से अस्पताल को संचालन की अनुमति स्वतः मिल जाती है या नहीं, यह संबंधित आदेशों और पंजीकरण अभिलेखों से स्पष्ट होना चाहिए
सील काटने का वायरल वीडियो, स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट भी चर्चा में
*पूर्व में सोशल मीडिया पर अस्पताल की सील काटते*हुए एक वीडियो वायरल हुआ था*
शिकायतकर्ता के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने भी इस संबंध में रिपोर्ट तैयार कर थाने भेजी थी
शिकायतकर्ता का दावा है कि रिपोर्ट में वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति राकेश यादव जैसा प्रतीत होने का उल्लेख था
अब शिकायतकर्ता सवाल उठा रहे हैं कि जिस व्यक्ति को लेकर पहले रिपोर्ट तैयार किए जाने की बात सामने आई, उससे संबंधित अस्पताल की सील खोलने की प्रक्रिया में क्या भूमिका रही? हालांकि, वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की पहचान और उसकी भूमिका की पुष्टि संबंधित अभिलेखों एवं जांच से ही हो सकती है
*नाम बदलकर नए संचालक के पंजीकरण की तैयारी का दावा*
सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल का नाम बदलकर नए संचालक के नाम से पंजीकरण कराने के लिए आवेदन तैयार किए जाने की चर्चा है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है
शिकायतकर्ता ने पूर्व में इसी स्थान पर संचालित अस्पताल के संबंध में भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल का नाम बदलने से पुराने प्रकरणों और जांच में सामने आई अनियमितताओं की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि वर्तमान परिसर में अस्पताल संचालन के लिए कौन-सा पंजीकरण प्रभावी है और नए पंजीकरण के लिए कोई आवेदन प्राप्त हुआ है या नहीं
*लोक सेवा गारंटी अधिनियम और जांच आख्या पर उठे सवाल*
शिकायतकर्ता ने सील खोलने की प्रक्रिया को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के उल्लंघन से भी जोड़ा है। उनका कहना है कि संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार निर्णय लेना चाहिए। हालांकि, अधिनियम के उल्लंघन का निष्कर्ष निकालने के लिए यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि किस अधिसूचित सेवा या वैधानिक दायित्व का उल्लंघन हुआ
शिकायतकर्ता के अनुसार, पूर्व जांच आख्या में अस्पताल के नियमों के उल्लंघन का उल्लेख था
ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को बताना चाहिए कि उन कमियों का निस्तारण हुआ या नहीं और सील खोलने से पहले नया निरीक्षण कराया गया था या नहीं
नवजात की मौत के मामले में भी जवाबदेही की मांग
जनता सेवा हॉस्पिटल से जुड़े नवजात शिशु की मौत के मामले में भी निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है
शिकायतकर्ता का कहना है कि अस्पताल की सील खोलने की प्रक्रिया और नवजात की मौत से जुड़े मामले में पारदर्शिता आवश्यक है
दोनों मामलों में कार्रवाई की वास्तविक स्थिति संबंधित अभिलेखों और जांच रिपोर्ट के आधार पर सामने आनी चाहिए
*सात अहम सवाल, जिनका जवाब जरूरी
सील खोलने का लिखित आदेश किस आधार पर जारी किया गया?*
क्या पूर्व जांच आख्या में दर्ज कमियों का निस्तारण सत्यापित किया गया?
पंजीकृत संचालक प्रमोद कुमार की अनुपस्थिति में चाबी किसे सौंपी गई?
वायरल वीडियो और स्वास्थ्य विभाग की पूर्व रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई हुई?
अस्पताल के वर्तमान पंजीकरण और संचालन की अनुमति की स्थिति क्या है?
क्या नए नाम और संचालक के साथ पंजीकरण के लिए आवेदन दिया गया है?
नवजात की मौत के मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई?
शिकायतकर्ता बोले—अभी लड़ाई खत्म नहीं हुई
शिकायतकर्ता ने स्पष्ट कहा कि मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है। वह उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में अपना पक्ष रखेंगे
उनका कहना है कि सील खोलने के निर्णय से जुड़े अधिकारियों को भी अपने फैसले का आधार स्पष्ट करना पड़ सकता है
उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई हो
फिलहाल, सीएमओ कार्यालय का विस्तृत आधिकारिक पक्ष, सील खोलने का आदेश और अस्पताल के पंजीकरण संबंधी अभिलेख सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी



