दलित परिवार पर हमले का आरोप, दूसरे पक्ष की तहरीर पर कार्रवाई होने की बात कहकर पीड़ित को टालने का दावा; ग्रामसभा प्रधान की जांच कराने की रंजिश में मारपीट का आरोप, चोटिल बच्चों को लेकर एसपी एवं डीआईजी कार्यालय पहुंचा परिवार
रिपोर्टर राहुल सिंह स्टेट हेड दूरदर्पण न्यूज उत्तर प्रदेश
बस्ती। रुधौली थाना क्षेत्र के मुडाडीहा उर्फ भोपालपुर गांव में मारपीट के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं पीड़ित प्रवीण का आरोप है कि बच्चों को मेला दिखाकर बाइक से घर लौटते समय उसकी बाइक में जोरदार टक्कर मारी गई। इसके बाद लाठी-डंडों से मारपीट की गई। पीड़ित ने जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है
दो दिन से बच्चे का इलाज करा रहा पीड़ित, डॉक्टर ने सीटी स्कैन की सलाह दी
पीड़ित प्रवीण का कहना है कि घटना में उसका बच्चा चोटिल हुआ है और वह पिछले दो दिनों से उसका इलाज करा रहा है। पीड़ित के मुताबिक, चिकित्सक ने बच्चे का सीटी स्कैन कराने की भी सलाह दी है। इसके बावजूद पुलिस द्वारा मामले को गंभीरता से नहीं लिए जाने का आरोप लगाया गया है बच्चे की चोट और चिकित्सकीय सलाह से संबंधित दस्तावेज जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं
दूसरे पक्ष की तहरीर पर कार्रवाई, पीड़ित की शिकायत पर सुनवाई नहीं होने का आरोप
प्रवीण का आरोप है कि दूसरे पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई की है, जबकि उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा
पीड़ित का कहना है कि थाना प्रभारी संजय दुबे कथित तौर पर यह कहकर उसे टाल रहे हैं कि दूसरे पक्ष के मामले में कार्रवाई हो चुकी है और वह अपना मुकदमा दर्ज नहीं करा सकता
हालांकि, दूसरे पक्ष की शिकायत पर वास्तव में कौन-सी कार्रवाई हुई है, क्या प्राथमिकी दर्ज की गई है और पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने क्या कार्रवाई की है, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है
‘फालतू आए हो थाने!’—थाना प्रभारी पर अभद्र व्यवहार का आरोप बातचीत की रिकार्डिंग सुरक्षित – पीड़ित
पीड़ित प्रवीण का दावा है कि शिकायत लेकर रुधौली थाने पहुंचने पर थाना प्रभारी ने कथित तौर पर उससे कहा, ‘फालतू आए हो थाने!’ पीड़ित का कहना है कि उसके पास थाने में हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित है
रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और उसमें दर्ज बातचीत की जांच होने पर ही इस आरोप की पुष्टि हो सकेगी
ग्रामसभा प्रधान की जांच कराने के बाद रंजिश का आरोप
पीड़ित के अनुसार, उसने ग्रामसभा प्रधान के कार्यों की जांच कराई थी। इसी वजह से कुछ लोग उससे नाराज रहते हैं। उसका आरोप है कि इसी रंजिश के चलते उसके परिवार के साथ मारपीट की गई। मामले में कथित रंजिश और घटना के बीच संबंध की जांच किया जाना आवश्यक है
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला, संज्ञेय अपराध की सूचना पर कार्रवाई जरूरी
पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई को लेकर ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार, 2013 के फैसले का संदर्भ भी प्रासंगिक है सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि जब पुलिस को दी गई सूचना से संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है, तो नियमानुसार एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है
इस सिद्धांत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संज्ञेय अपराध की सूचना को बिना उचित कानूनी आधार के नजरअंदाज न किया जाए
हालांकि, दोनों पक्षों को चोट लगने की स्थिति में प्रत्येक मामले में दोनों पक्षों की प्राथमिकी तत्काल दर्ज करना स्वतः लागू होने वाला सार्वभौमिक नियम नहीं है। पुलिस को दोनों पक्षों की शिकायतों, मेडिकल रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच कर लागू कानून के अनुसार निर्णय लेना चाहिए
एसपी बस्ती से सवाल—क्या पीड़ित परिवार को मिलेगा न्याय?
घटना के तीन दिन बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए प्रवीण चोटिल बच्चों के साथ डीआईजी कार्यालय पहुंचा और न्याय की गुहार लगाई। अब सवाल यह है कि क्या पुलिस अधीक्षक बस्ती मामले का संज्ञान लेकर बच्चे के चिकित्सकीय दस्तावेजों, सीटी स्कैन की सलाह, दोनों पक्षों की तहरीरों और कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच कराएंगे?
एक लोक सेवक की जिम्मेदारी है कि वह शिकायतकर्ता की बात सुने और कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करे यदि पीड़ित के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए
थानेदार ने कहा कानून ना दिखावों जेसे मामले रोज देखता हूं
फिलहाल इस मामले को एएसपी बस्ती को सूचित किया गया है कहा गया है की कार्रवाई की जाएगी



