
2027 से पहले राजकिशोर सिंह के सामने नई चुनौती? पूर्व प्रमुख सचिव की गिरफ्तारी से बढ़ी हलचल, शासन में लंबित फाइल पर टिकी नजरें
रिपोर्टर राहुल सिंह स्टेट हेड उत्तर प्रदेश
बस्ती। उत्तर प्रदेश की तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में हुए पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती मामले में सेवानिवृत्त आईएएस एवं तत्कालीन प्रमुख सचिव पशुपालन योगेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद बस्ती के पूर्व पशुपालन मंत्री राजकिशोर सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) की कार्रवाई के बाद जहां भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं पूर्व मंत्री के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति की लंबित फाइल और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं
चल रहे खबर की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। भर्ती प्रक्रिया के नियमों में संशोधन से संबंधित दस्तावेजों पर तत्कालीन मंत्री और प्रमुख सचिव के हस्ताक्षर होने की जानकारी सामने आई है। पूर्व प्रमुख सचिव की गिरफ्तारी के बाद शासन स्तर पर लंबित अभियोजन स्वीकृति की फाइल महत्वपूर्ण हो गई है
1,198 पदों की भर्ती में नियमों में बदलाव पर उठे सवाल
वर्ष 2014 में प्रदेश के 17 मंडलों में 1,198 पशुधन प्रसार अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी। उस समय राजकिशोर सिंह पशुपालन मंत्री थे और योगेश कुमार विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर तैनात थे।
भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद जांच शुरू हुई। चयन प्रक्रिया, ओएमआर शीट के मूल्यांकन और मेरिट सूची तैयार करने के तरीके को लेकर सवाल उठे। आरोपों के अनुसार, मंडल स्तर पर चयन की निर्धारित व्यवस्था में बदलाव करते हुए मूल्यांकन मुख्यालय स्तर पर कराया गया और केंद्रीकृत मेरिट सूची तैयार की गई
जांच एजेंसी इस मामले में विभिन्न अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर चुकी है। तत्कालीन प्रमुख सचिव की गिरफ्तारी के बाद पूर्व मंत्री की भूमिका और उनके विरुद्ध आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर चर्चा बढ़ गई है
शासन की अनुमति पर टिकी निगाहें
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राजकिशोर सिंह के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति से संबंधित फाइल शासन स्तर पर लंबित बताई जा रही है। आगे की कानूनी कार्रवाई शासन के निर्णय और जांच एजेंसी की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
यदि अभियोजन स्वीकृति मिलती है, तो मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, अभियोजन स्वीकृति, गिरफ्तारी और दोषसिद्धि अलग-अलग कानूनी चरण हैं। किसी व्यक्ति के विरुद्ध आरोप या जांच अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है
पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह ने क्या कहा?
पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह ने तत्कालीन प्रमुख सचिव योगेश कुमार की गिरफ्तारी के संबंध में कहा कि उन्हें गिरफ्तारी की जानकारी नहीं है
पूरी जानकारी प्राप्त करने के बाद ही वह आधिकारिक बयान दे पाएंगे उनके इस बयान के बाद अब इस मामले में उनकी विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है
छात्र राजनीति से मंत्री पद तक का सफर
राजकिशोर सिंह ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। वह वर्ष 1990-91 में बस्ती के एपीएन पीजी कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। वर्ष 2002 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर हर्रैया विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए और मायावती सरकार में मंत्री बने
बाद में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए
वर्ष 2007 में सपा के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद प्रदेश सरकार में मंत्री बने
अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में उन्हें पशुपालन एवं पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी मिली
राजकिशोर सिंह का बस्ती जिले की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव रहा है। उनकी माता शारदा सिंह और पुत्र देवेंद्र प्रताप सिंह शानू जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। जिला पंचायत की राजनीति में भी उनके परिवार की सक्रियता चर्चा में रही है
वर्ष 2014 में उन्होंने बस्ती लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा के हरीश द्विवेदी से हार गए। वर्ष 2016 में उन्हें मंत्रिमंडल से हटाए जाने और सपा से बाहर किए जाने के बाद उनके राजनीतिक सफर में उतार-चढ़ाव आया
2017 और 2022 की हार के बाद भाजपा में शामिल हुए
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में राजकिशोर सिंह कांग्रेस के टिकट पर और वर्ष 2022 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर हर्रैया विधानसभा सीट से चुनाव लड़े, लेकिन दोनों बार उन्हें सफलता नहीं मिली
इसके बाद 3 मई 2024 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने हर्रैया क्षेत्र में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई है
उनकी अगली राजनीतिक भूमिका और विधानसभा चुनाव में दावेदारी को लेकर चर्चाएं जारी हैं। मीडिया रिपोर्टों में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें बड़ी संगठनात्मक या राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं मिलने का भी उल्लेख किया गया है
2027 से पहले राजकिशोर सिंह के सामने नई चुनौती?
हर्रैया विधानसभा सीट पर आगामी चुनाव को लेकर संभावित दावेदारों और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी नजर है। वर्तमान विधायक अजय सिंह के रहते भाजपा किसे आगे करती है, यह भविष्य में स्पष्ट होगा।
ऐसे में पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती मामले में चल रही जांच और अभियोजन स्वीकृति से जुड़ा घटनाक्रम राजकिशोर सिंह की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है
यदि इस प्रकरण में आगे कोई कानूनी कार्रवाई होती है, तो उसका असर उनकी चुनावी तैयारियों और राजनीतिक दावेदारी पर पड़ सकता है
फिलहाल, पूर्व प्रमुख सचिव की गिरफ्तारी के बाद मामला फिर सुर्खियों में है। अब सबकी निगाहें जांच एजेंसी की अगली कार्रवाई, शासन के निर्णय और पूर्व मंत्री की विस्तृत प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।



