हरिद्वार। साइबर अपराधों पर प्रभावी रोकथाम और डिजिटल ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, देहरादून ने हरिद्वार स्थित एक होटल कारोबारी के साथ हुई 50 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में अज्ञात अपराधियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। ठगों ने पीड़ित को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर और फर्जी कानूनी प्रक्रिया में फंसाकर इस गंभीर वारदात को अंजाम दिया है।
घटना के संबंध में हरिद्वार निवासी शिकायतकर्ता श्रीमती सनोज ने पुलिस को दी अपनी तहरीर में बताया कि गत 14 अक्टूबर को उनके पति रवि कुमार के मोबाइल फोन पर एक अज्ञात व्यक्ति की कॉल आई। फोन करने वाले ने दावा किया कि पीड़ित के आधार कार्ड का उपयोग करके दिल्ली स्थित केनरा बैंक, दरियागंज शाखा में एक फर्जी खाता खोला गया है। उसने बताया कि इस खाते का उपयोग जेट एयरवेज के पूर्व मालिक नरेश गोयल से जुड़े वित्तीय गबन तथा 247 संदिग्ध एटीएम कार्डों के माध्यम से किए गए अवैध लेनदेन में हुआ है। आरोपियों ने पीड़ित दंपत्ति को डराते हुए आरोप लगाया कि उनके नाम से दर्ज इस बैंक खाते में लगभग 6.80 करोड़ रुपये का अवैध लेनदेन दर्ज किया गया है।
इसके बाद शातिर अपराधियों ने अपनी साजिश को आगे बढ़ाते हुए पीड़ित को झांसे में लेने के लिए उनसे एक फॉर्म भरवाया और उनके मोबाइल में IMO ऐप डाउनलोड कराया। 15 अक्टूबर को ऐप के माध्यम से ‘राहुल गुप्ता’ नामक व्यक्ति ने ऑडियो-वीडियो कॉल की और स्वयं को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का वरिष्ठ अधिकारी बताया। आरोपियों ने पीड़ित के व्हाट्सएप अथवा ऐप पर न्यायालय की फर्जी कार्यवाही से संबंधित पांच पन्नों का एक पीडीएफ दस्तावेज भी भेजा। इसके साथ ही ठगों ने पीड़ित को सख्त हिदायत दी कि वे ‘डिजिटल अरेस्ट’ के तहत हैं और मामले की गोपनीयता बनाए रखने के लिए जब तक जांच जारी है, तब तक वे किसी भी रिश्तेदार या परिचित से न तो मिलेंगे और न ही कोई बात करेंगे।
आरोपियों के लगातार दबाव और गिरफ्तारी के भय में आकर पीड़ित दंपत्ति ने अपने सभी बैंक खातों का विवरण ठगों के साथ साझा कर दिया। इसके पश्चात ठगों के निर्देश पर पीड़ित ने आईडीबीआई बैंक में रखी अपनी एफडी तुड़वाकर 50 लाख रुपये आरोपियों द्वारा बताए गए एक बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। हालांकि, जब रकम किसी व्यक्तिगत या सरकारी खाते के बजाय एक निजी लिमिटेड कंपनी के खाते में मंगवाई गई, तो पीड़ित को धोखाधड़ी का संदेह हुआ। ठगी का अहसास होते ही पीड़ित परिवार ने तत्काल साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क कर आपबीती बताई।
पीड़ित की शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, देहरादून में अज्ञात साइबर ठगों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस की एक विशेष तकनीकी टीम मामले की गहन जांच कर रही है और जिस बैंक खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर की गई है, उसे प्राथमिकता के आधार पर फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
साइबर क्राइम पुलिस आम जनता से पुनः अपील करती है कि भारतीय कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है। पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), सीबीआई या कोई भी अन्य जांच एजेंसी कभी भी फोन, व्हाट्सएप या किसी भी वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार या डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। नागरिक किसी भी अनजान कॉल पर अपने बैंक खाते, एफडी अथवा गोपनीय वित्तीय दस्तावेज साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति फोन पर पुलिस या जांच एजेंसी का डर दिखाकर डराए, तो घबराएं नहीं और तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में संपर्क करें। किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी की आशंका होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें अथवा आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।



