हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में विजयादशमी का पावन पर्व बुधवार को अपार श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। अधर्म, अहंकार और बुराई पर धर्म, सत्य और मर्यादा की विजय के प्रतीक इस पर्व पर शहर के प्रमुख मैदानों में विशाल रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया गया, जिसे देखने के लिए स्थानीय निवासियों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े।
हरिद्वार की करीब 103 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक रामलीला परंपरा के तहत रोड़ी बेलवाला मैदान में इस बार 80 फीट ऊंचे रावण के विशाल पुतले का दहन किया गया। रामलीला के मंचन और रावण वध की इस ऐतिहासिक परंपरा के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और सनातन संस्कृति का संदेश जन-जन तक पहुँचाया गया। इसी प्रकार शहर के ऋषिकुल मैदान में भी 70 फीट ऊंचे रावण के पुतले का भव्य दहन किया गया, जहाँ परिवारों और बच्चों ने बड़े उत्साह के साथ इस आयोजन का आनंद लिया। इसके अलावा भेल टाउनशिप परिसर में भी रावण के विशाल पुतले का दहन कर असत्य पर सत्य की विजय का उद्घोष किया गया। इन आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को रामायण की कथा और भगवान श्रीराम के उच्च आदर्शों से परिचित होने का अवसर मिला।
एक तरफ जहाँ पूरे शहर में विजयादशमी का धार्मिक उल्लास छाया रहा, वहीं दूसरी ओर हरिद्वार स्थित परशुराम घाट पर स्वर्ण समाज के प्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा केंद्र सरकार की नीतियों और यूजीसी कानून के विरोध में एक अनूठा व प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया। स्वर्ण समाज के लोगों ने रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों पर ‘यूजीसी रोलबैक’और आरक्षण से संबंधित विरोध प्रदर्शन के पोस्टर चिपकाकर उनका दहन किया और केंद्र सरकार से इस कानून को तुरंत वापस लेने की पुरजोर मांग की। प्रदर्शनकारियों ने विजयादशमी के इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक बताते हुए अपनी आपत्तियों को सरकार तक पहुँचाने का माध्यम बनाया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वर्ण समाज के पदाधिकारी पदम प्रकाश शर्मा ने कहा कि जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने अधर्म और बुराई का अंत किया था, उसी भावना के साथ समाज के लोगों ने इस कानून के प्रति अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून युवाओं और बच्चों के भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाला है, इसलिए केंद्र सरकार को बिना किसी विलंब के इस पर पुनर्विचार कर इसे तुरंत रोलबैक करना चाहिए।
इस दौरान स्वामी कार्तिकेय ने जानकारी दी कि यूजीसी कानून के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन गत 8 मार्च से निरंतर जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ऐसी नीतियां विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच असमानता और मतभेद बढ़ाने का काम कर रही हैं। उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि यदि सरकार ने उनकी इन जायज मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले समय में स्वर्ण समाज को पूरी तरह एकजुट कर इस आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा।
पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह कानून स्वर्ण समाज पर जबरन थोपा जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। परशुराम घाट पर एकत्रित हुए समाज के सभी लोगों ने एक स्वर में केंद्र सरकार से यूजीसी कानून को पूरी तरह निरस्त करने की अपनी मांग दोहराई।
इस प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन के अवसर पर पदम प्रकाश शर्मा, स्वामी कार्तिकेय, पंडित पवन कृष्ण शास्त्री सहित स्वर्ण समाज के अनेक गणमान्य प्रतिनिधि, प्रबुद्ध नागरिक और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।



