देहरादून। जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए उत्तराखंड शासन ने राज्यभर में तंबाकू और निकोटिन युक्त गुटखा, पान मसाला एवं इसी प्रकार के अन्य खाद्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने मंगलवार को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विक्रय प्रतिषेध और निर्बन्धन) विनियम, 2011 के प्रावधानों के अंतर्गत यह सख्त कदम उठाया गया है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि खाद्य उत्पादों में तंबाकू और निकोटिन का उपयोग कानूनन प्रतिबंधित है, इसके बावजूद विभिन्न उत्पादों में इनका धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था, जो सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
आदेश की मुख्य बातें:
- प्रभाव: यह प्रतिबंध पूरे उत्तराखंड राज्य में एक साल तक प्रभावी रहेगा।
- दायरे में आने वाले उत्पाद: तंबाकू और निकोटिन युक्त गुटखा, पान मसाला तथा बाजार में अन्य नामों से उपलब्ध ऐसे तमाम खाद्य उत्पाद।
- पाबंदी: इन उत्पादों के विनिर्माण (उत्पादन), भंडारण, परिवहन, वितरण और खुदरा बिक्री पर पूरी रोक रहेगी।
आदेश के कड़ाई से पालन के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक, समस्त जिलों के जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्साधिकारियों को विस्तृत निर्देश भेज दिए गए हैं। इसके साथ ही, खाद्य सुरक्षा विभाग के मंडलीय तथा जिला स्तरीय अधिकारियों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में औचक निरीक्षण करने और सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तराखंड सरकार के इस कदम का उद्देश्य युवाओं और आम नागरिकों को तंबाकू से होने वाली गंभीर बीमारियों से बचाना है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कारोबारियों से लेकर खुदरा दुकानदारों तक असर
प्रतिबंध के चलते संबंधित उत्पादों के निर्माता, थोक विक्रेता, वितरक और खुदरा दुकानदार प्रभावित हो सकते हैं। जिन कारोबारियों ने इन उत्पादों का स्टॉक रखा है, उनके सामने भी माल के निस्तारण और नियमों के अनुपालन का सवाल खड़ा हो सकता है। हालांकि, स्टॉक को लेकर क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी, यह संबंधित विभाग के निर्देशों और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा।



